कागज़ात

घोषणा हेतु वाद

एक नज़र में

कीमत
हमेशा मुफ़्त।
स्टाम्प ड्यूटी
अभिवचन पर स्वयं कोई स्टांप-पेपर शुल्क नहीं लगता; उस पर न्यायालय का अपना कोर्ट-फ़ीस स्टांप लगता है।
रजिस्ट्री
रजिस्ट्रीकरण योग्य नहीं: न्यायालय का कागज़ रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1908 की धारा 17 के अंतर्गत लिखत नहीं है।
गवाह
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इन नामों से भी

  • declaratory suit
  • suit for declaration of title
  • suit to declare will valid or void
  • declaration of status
  • घोषणा का दावा
  • ਘੋਸ਼ਣਾ ਦਾ ਦਾਅਵਾ

दस्तावेज़ ख़ुद अंग्रेज़ी में है। भारत में इस तरह के काग़ज़ आमतौर पर अंग्रेज़ी में ही बनते हैं, और रजिस्ट्रार, बैंक या अदालत में वही शब्द पढ़े जाते हैं जो लिखे गए हैं। जिन दस्तावेज़ों के हिन्दी अनुवाद को हम जाँचकर स्वीकृत कर देते हैं, उनके लिए यह मंच अंग्रेज़ी के साथ वह अनुवाद भी देता है; अनुवाद और अंग्रेज़ी पाठ में अंतर होने पर अंग्रेज़ी पाठ ही मान्य होगा।

कब ज़रूरत पड़ती है

एक दीवानी वाद जिसमें न्यायालय से ऐसे अधिकार की घोषणा माँगी जाती है जिसे कोई और नकार रहा है या जिस पर संदेह की छाया डाल रहा है: कि आप किसी संपत्ति के मालिक हैं, कि कोई वसीयत वैध है या शून्य है, या कि आपकी कोई पारिवारिक हैसियत है जैसे पुत्र या वारिस होना। यह विनिर्दिष्ट अनुतोष अधिनियम, 1963 की धारा 34 के अंतर्गत लाया जाता है।

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न्यायालय केवल घोषणा देने से मना कर सकता है यदि आप अधिक माँग सकते थे, जैसे कब्ज़ा या निषेधाज्ञा, इसलिए मसौदा आपसे पूछता है कि कोई और अनुतोष उपलब्ध है या नहीं। न्यायालय के कागज़ आमतौर पर अधिवक्ता के माध्यम से दाख़िल होते हैं, जो वकालतनामा भी दाख़िल करता है; यह फ़ॉर्म उनके सँवारने के लिए मसौदा तैयार करता है। कोर्ट-फ़ीस घोषणा के प्रकार और मूल्यांकन पर निर्भर है और यहाँ पुष्ट नहीं की गई; दाख़िला काउंटर से पूछें। इसके लिए नहीं: वसीयत को विधिवत सिद्ध कराना (प्रोबेट या प्रशासन-पत्र एक अलग याचिका है), या ऐसा विवाद जिसमें आप कब्ज़े से बाहर हैं और संपत्ति वापस चाहिए (कब्ज़े हेतु वाद का उपयोग करें या वह अनुतोष जोड़ने पर सलाह लें)।

क्या यह यहीं भरा जा सकता है

यह यहीं भरा जा सकता है

यह दस्तावेज़ आप इसी साइट पर भर सकते हैं, और कुछ भी तय करने से पहले पूरा मसौदा स्क्रीन पर पढ़ सकते हैं। यह ध्यान से तैयार किया गया प्रारूप है; आपके अपने हालात पर दी गई सलाह नहीं।

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स्टाम्प ड्यूटी, रजिस्ट्री और गवाह देखें

नीचे जो लिखा है वह पंजाब और चंडीगढ़ के लिए है। इसमें वहीं की स्थिति दी गई है, यह नहीं कि यह कहाँ-कहाँ कैसे बदलती है — यानी नीचे की रकमें वही हैं जो लागू होती हैं। दरें बदलती रहती हैं, इसलिए सब-रजिस्ट्रार दफ़्तर से पक्का कर लेना ठीक रहता है। अगर प्रॉपर्टी भारत में कहीं और है, तो इनमें से कुछ भी आपके लिए नहीं है।

स्टाम्प ड्यूटी

अभिवचन पर स्वयं कोई स्टांप-पेपर शुल्क नहीं लगता; उस पर न्यायालय का अपना कोर्ट-फ़ीस स्टांप लगता है। पंजाब और चंडीगढ़ में इस प्रकार के दाख़िले की कोर्ट-फ़ीस की राशि यहाँ पुष्ट नहीं की गई है: अपने मूल्यांकन पर राशि के लिए न्यायालय के दाख़िला काउंटर (नाज़रात) या अपने अधिवक्ता से पूछें, और अधिवक्ता लगाने पर वकालतनामे के स्टांप के लिए भी।

रजिस्ट्री

रजिस्ट्रीकरण योग्य नहीं: न्यायालय का कागज़ रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1908 की धारा 17 के अंतर्गत लिखत नहीं है। परिणामी डिक्री का, यदि आवश्यक हो, अपना रजिस्ट्रीकरण या इंतक़ाल का चरण होता है।

नोटरी

कागज़ पक्षकार द्वारा सत्यापित और हस्ताक्षरित होता है; नोटरी से प्रमाणित नहीं होता। उसके साथ दाख़िल कोई अलग शपथ-पत्र (इस लाइब्रेरी का सामान्य न्यायालय शपथ-पत्र चल जाएगा) शपथ आयुक्त या नोटरी के समक्ष शपथित होता है।

गवाह

कागज़ के लिए किसी की आवश्यकता नहीं। साक्ष्य बाद में न्यायालय की अपनी प्रक्रिया में दिया जाता है।

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Sample preview — placeholder answers, not your data

SUIT FOR DECLARATION

IN THE COURT OF Civil Judge (Senior Division), S.A.S. Nagar (Mohali)

Civil Suit No. ............ of ............

Harpreet Singh, S/o Sh. Amarjit Singh, aged 52 years, retired, resident of House No. 214, Phase 3B1, S.A.S. Nagar (Mohali) ... Plaintiff

versus

Jaswinder Singh, S/o Sh. Gurdev Singh, aged 47 years, businessman, resident of House No. 9, Sector 21-C, Chandigarh ... Defendant

Suit for a declaration concerning the plaintiff's title to the suit property, under section 34 of the Specific Relief Act, 1963.

The plaintiff states as follows:

  1. 1. THE SUBJECT OF THE SUIT. House No. 47, Sector 22-B, Chandigarh, 10 marla, bounded on the north by House No. 48 and on the south by a 20-foot road
  1. 2. THE PLAINTIFF'S RIGHT. The plaintiff inherited the house from his late father, Sh. Hari Singh, who died on 14.02.2020 leaving the plaintiff and his sister as heirs; the sister released her share by registered deed dated 03.06.2020.
  1. 3. THE DEFENDANT'S DENIAL. The defendant has claimed in a letter to the municipal office that he is the owner under a will dated 02.01.2020, which the plaintiff says is forged. The denial or dispute first arose on 1 April 2026. It casts a cloud on the plaintiff's right, and the plaintiff is therefore entitled to a declaration.
  1. 4. FURTHER RELIEF. No further relief is available to the plaintiff at present, so a declaration alone is sought.
  1. 5. JURISDICTION AND VALUATION. The cause of action arose, and the suit property lies, within the territorial limits of this Court. The suit is valued at ₹15,00,000 (Rupees Fifteen Lakh only) for jurisdiction and court fee. Court fee is paid as the court fee table of this Court requires on that valuation.
  1. 6. OTHER PROCEEDINGS. No other suit or proceeding between the parties on the same matter has been filed or decided.
  1. 7. DOCUMENTS. The plaintiff relies on: Sale deed or inheritance papers; death certificate; the will or other paper the defendant relies on; the defendant's letter dated 10.03.2026..

PRAYER

The plaintiff prays for a decree declaring that the plaintiff is the sole owner of the suit property and that the will dated 02.01.2020 set up by the defendant is forged, void and not binding on the plaintiff; for the costs of the suit; and for any other relief the Court thinks fit.

VERIFICATION

Verified at S.A.S. Nagar (Mohali) on 2 April 2026 that paragraphs 1 to 5 are true to my knowledge and paragraphs 6 to 7 are true on the records and on information I believe to be true; nothing material has been concealed.

Plaintiff: Harpreet Singh

Through counsel: Sh. Gurpreet Singh Dhillon, Advocate, Chamber No. 214, District Courts, Sector 43, Chandigarh

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