कागज़ात

एफ़आईआर के आदेश हेतु मैजिस्ट्रेट को आवेदन

एक नज़र में

कीमत
हमेशा मुफ़्त।
स्टाम्प ड्यूटी
फाइलिंग पर न्यायालय का अपना कोर्ट-फ़ीस स्टांप देय होता है, जो न्यायालय कार्यालय तय करता है; राशि यहाँ नहीं दी गई क्योंकि हर न्यायालय पर लागू कोई एक आँकड़ा पुष्ट नहीं हुआ है, इसलिए न्यायालय के फाइलिंग काउंटर पर वर्तमान राशि की पुष्टि करें।
रजिस्ट्री
पंजाब और चंडीगढ़: रजिस्ट्रेशन-योग्य नहीं।
गवाह
पंजाब और चंडीगढ़: कोई अनुप्रमाणित साक्षी हस्ताक्षर नहीं करता।

मुफ़्त

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इन नामों से भी

  • Magistrate FIR order
  • application to Magistrate for FIR
  • court order for FIR
  • FIR through court
  • मैजिस्ट्रेट को एफ़आईआर के लिए आवेदन
  • ਮੈਜਿਸਟ੍ਰੇਟ ਨੂੰ ਐੱਫ਼ਆਈਆਰ ਲਈ ਅਰਜ਼ੀ

दस्तावेज़ ख़ुद अंग्रेज़ी में है। भारत में इस तरह के काग़ज़ आमतौर पर अंग्रेज़ी में ही बनते हैं, और रजिस्ट्रार, बैंक या अदालत में वही शब्द पढ़े जाते हैं जो लिखे गए हैं। जिन दस्तावेज़ों के हिन्दी अनुवाद को हम जाँचकर स्वीकृत कर देते हैं, उनके लिए यह मंच अंग्रेज़ी के साथ वह अनुवाद भी देता है; अनुवाद और अंग्रेज़ी पाठ में अंतर होने पर अंग्रेज़ी पाठ ही मान्य होगा।

कब ज़रूरत पड़ती है

पंजाब या चंडीगढ़ में थाने ने आपकी प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज नहीं की, फिर आपने अपनी सूचना का सार पुलिस अधीक्षक को भेजा, और फिर भी कुछ नहीं हुआ। अगला कदम मैजिस्ट्रेट को आवेदन है, जो आपके शपथ-पत्र से समर्थित हो, जिसमें न्यायालय से अनुरोध है कि वह पुलिस को रिपोर्ट दर्ज करने और अन्वेषण करने का निर्देश दे।

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यह आवेदन अपराध, आपकी दी हुई सूचना और कब, पुलिस अधीक्षक को शिकायत और उसका नतीजा, अन्वेषण क्यों आवश्यक है, और आप कौन-सा आदेश चाहते हैं, यह बताता है, और इसमें समर्थन का शपथ-पत्र भी है। यह तीसरा कदम है, पुलिस को शिकायत (सामान्य) अथवा थाने को अन्य शिकायत, और एसएसपी को शिकायत: एफ़आईआर दर्ज नहीं हुई, के बाद। 1 जुलाई 2024 को या उसके बाद की घटना के लिए इसका प्रयोग करें। न्यायालय के आवेदन प्रायः अधिवक्ता के माध्यम से दाख़िल किए जाते हैं; आप स्वयं भी दाख़िल कर सकते हैं, और यदि अधिवक्ता आपकी ओर से दाख़िल करे तो अधिवक्ता का नाम और पता (वैकल्पिक) भरें। कोर्ट-फ़ीस और शपथ-पत्र पर स्टांप फाइलिंग काउंटर पर तय करें। आवेदन दोष का निर्णय नहीं करता; वह केवल अन्वेषण माँगता है।

क्या यह यहीं भरा जा सकता है

यह यहीं भरा जा सकता है

यह दस्तावेज़ आप इसी साइट पर भर सकते हैं, और कुछ भी तय करने से पहले पूरा मसौदा स्क्रीन पर पढ़ सकते हैं। यह ध्यान से तैयार किया गया प्रारूप है; आपके अपने हालात पर दी गई सलाह नहीं।

इसे भरना शुरू कीजिए
स्टाम्प ड्यूटी, रजिस्ट्री और गवाह देखें

नीचे जो लिखा है वह पंजाब और चंडीगढ़ के लिए है। इसमें वहीं की स्थिति दी गई है, यह नहीं कि यह कहाँ-कहाँ कैसे बदलती है — यानी नीचे की रकमें वही हैं जो लागू होती हैं। दरें बदलती रहती हैं, इसलिए सब-रजिस्ट्रार दफ़्तर से पक्का कर लेना ठीक रहता है। अगर प्रॉपर्टी भारत में कहीं और है, तो इनमें से कुछ भी आपके लिए नहीं है।

स्टाम्प ड्यूटी

फाइलिंग पर न्यायालय का अपना कोर्ट-फ़ीस स्टांप देय होता है, जो न्यायालय कार्यालय तय करता है; राशि यहाँ नहीं दी गई क्योंकि हर न्यायालय पर लागू कोई एक आँकड़ा पुष्ट नहीं हुआ है, इसलिए न्यायालय के फाइलिंग काउंटर पर वर्तमान राशि की पुष्टि करें। इसके साथ लगने वाला शपथ-पत्र, जब लंबित न्यायिक कार्यवाही में दाख़िल हो, सामान्यतः अनुच्छेद 4, अनुसूची I-A (पंजाब) अथवा अनुसूची I (चंडीगढ़) के अंतर्गत नाममात्र शपथ-पत्र शुल्क से मुक्त होता है, अन्यथा वह नाममात्र शुल्क लगता है; यह भी काउंटर पर पुष्ट करें।

रजिस्ट्री

पंजाब और चंडीगढ़: रजिस्ट्रेशन-योग्य नहीं। यह न्यायालय के अपने रजिस्ट्री कार्यालय में दाख़िल किया जाता है, मामले के अभिलेख का भाग बन जाता है, और यह ऐसा दस्तावेज़ नहीं है जिस तक रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1908 पहुँचता हो।

नोटरी

पंजाब और चंडीगढ़: इसके साथ लगने वाला शपथ-पत्र नोटरी पब्लिक, न्यायालय से संबद्ध शपथ आयुक्त, अथवा स्वयं न्यायालय के समक्ष शपथबद्ध किया जाता है, जैसा किसी अन्य सत्यापित काग़ज़ के लिए होता है। शपथकर्ता फ़ोटो पहचान-पत्र सहित स्वयं उपस्थित होता है।

गवाह

पंजाब और चंडीगढ़: कोई अनुप्रमाणित साक्षी हस्ताक्षर नहीं करता। पक्षकार के हस्ताक्षर और, जहाँ अधिवक्ता दाख़िल करे, अधिवक्ता के हस्ताक्षर ही पूरी औपचारिकता हैं। न्यायालय के काग़ज़ात प्रायः अधिवक्ता के माध्यम से दाख़िल किए जाते हैं; आप स्वयं भी दाख़िल कर सकते हैं, और यदि अधिवक्ता आपकी ओर से दाख़िल करे तो अधिवक्ता का नाम और पता (वैकल्पिक) भरें।

स्टाम्प पेपर का अनुरोध करें

Sample preview — placeholder answers, not your data

IN THE COURT OF THE CHIEF JUDICIAL MAGISTRATE, LUDHIANA

APPLICATION UNDER SECTION 175(3) OF THE BHARATIYA NAGARIK SURAKSHA SANHITA, 2023 FOR A DIRECTION TO REGISTER A FIRST INFORMATION REPORT AND INVESTIGATE

Manjit Kaur, wife of Balbir Singh, aged 58, of House No. 221, Street No. 4, Gurdev Nagar, Ludhiana 141001 ... APPLICANT

VERSUS

The Officer in Charge, Police Station Division No. 5, Ludhiana, and Ravinder Singh son of Gurnam Singh, proprietor of Sunrise Motors, Ferozepur Road, Ludhiana ... RESPONDENTS

MOST RESPECTFULLY SHOWETH:

  1. 1. The offence. The Applicant complains of cheating, in that Ravinder Singh took Rs 2,50,000 from me for a car he never delivered, and threatened my son when I asked for the money back. On or about 1 April 2026, Ravinder Singh took the money as a booking amount, promised delivery within 30 days and gave a receipt; no car was delivered and he stopped answering my calls.
  1. 2. Information to the police station. On 2 April 2026 the Applicant gave information to the officer in charge of Police Station Division No. 5, Ludhiana, in writing, by handing a written complaint to the duty officer. The duty officer refused to record the information and said it was a civil matter. The information was not recorded as a first information report.
  1. 3. Complaint to the Superintendent of Police. On 3 April 2026 the Applicant sent the substance of that information in writing by registered post, the postal receipt being enclosed to the Senior Superintendent of Police, Ludhiana, as section 173(4) of the Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023 allows. No reply has been received and the police station has still not recorded the information.
  1. 4. Why an investigation is needed. The facts stated disclose a cognizable offence. A police investigation is needed because the accused controls the records and the showroom, and only the police can trace the money and secure the records.
  1. 5. Earlier applications and other proceedings. No earlier application has been made to any court on these facts.
  1. 6. Affidavit and enclosures. This application is supported by the Applicant's affidavit, which follows it. Copies of the information given to the police station and of the complaint to the Superintendent of Police are enclosed. Also enclosed: the booking receipt and the bank statement.

PRAYER

It is therefore most respectfully prayed that this Hon'ble Court may be pleased to:

(a) direct the Officer in Charge, Police Station Division No. 5, Ludhiana, under section 175(3) of the Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023, to register a first information report on the facts stated above and to investigate them;

(b) direct that the Applicant be given a copy of the first information report free of cost; and

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