कागज़ात

डेयरी फ़ार्म साझेदारी करार

एक नज़र में

कीमत
हमेशा मुफ़्त।
स्टाम्प ड्यूटी
साझेदारी के दस्तावेज़ पर पंजाब में लागू अनुसूची I-A की साझेदारी प्रविष्टि के अंतर्गत, या चंडीगढ़ की संगत प्रविष्टि के अंतर्गत, शुल्क लगता है, और शुल्क प्रायः लगाई गई पूँजी पर निर्भर होता है। इस मसौदाकार को दोनों के लिए कोई एक वर्तमान राशि पक्की नहीं मिली, इसलिए कोई राशि नहीं लिखी गई। स्टाम्प ख़रीदने से पहले सरकारी ई-स्टाम्पिंग पोर्टल पर या उप-पंजीयक के काउंटर पर पूछ लें, और हस्ताक्षर से पहले ई-स्टाम्प लें। साझेदारों या हिस्सों में बाद का कोई बदलाव नया दस्तावेज़ होगा।
रजिस्ट्री
यदि पूँजी केवल नक़दी, पशु और उपकरण हो, तो यह करार पंजीकृत कराना अनिवार्य नहीं है; यदि कोई साझेदार भूमि फ़र्म में लाए तो अनिवार्य होगा।
गवाह
क़ानूनन आवश्यक नहीं, पर गाँव के रिवाज़ में दो वयस्क साक्षी, जो पक्षकार न हों, रखे जाते हैं और नीचे उनके लिए स्थान है।

मुफ़्त

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मुफ़्त: एक दिन में 5 दस्तावेज़ तक।

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इन नामों से भी

  • dairy partnership deed
  • dairy farm partnership
  • milk business partnership
  • dairy sanjhedari
  • ਡੇਅਰੀ ਭਾਈਵਾਲੀ
  • डेयरी साझेदारी
  • cattle farm partnership
  • partnership for dairy

दस्तावेज़ ख़ुद अंग्रेज़ी में है। भारत में इस तरह के काग़ज़ आमतौर पर अंग्रेज़ी में ही बनते हैं, और रजिस्ट्रार, बैंक या अदालत में वही शब्द पढ़े जाते हैं जो लिखे गए हैं। जिन दस्तावेज़ों के हिन्दी अनुवाद को हम जाँचकर स्वीकृत कर देते हैं, उनके लिए यह मंच अंग्रेज़ी के साथ वह अनुवाद भी देता है; अनुवाद और अंग्रेज़ी पाठ में अंतर होने पर अंग्रेज़ी पाठ ही मान्य होगा।

कब ज़रूरत पड़ती है

इसका उपयोग तब करें जब दो लोग मिलकर डेयरी का कारोबार करें, जैसे एक के पास शेड और भूमि हो और दूसरा पशु या पैसा लाए, और वे इसे लिखित में चाहते हों। इसमें डेयरी का नाम और स्थान, प्रत्येक साझेदार क्या लगाता है (पशु, शेड, उपकरण, नक़दी, श्रम), लाभ-हानि का बँटवारा, रोज़मर्रा का काम कौन चलाए, दूध कहाँ बिके, बैंक खाता, प्रत्येक कितना निकाल सकता है, हिसाब कैसे रखा और दिखाया जाए, और कोई साझेदार छोड़ना चाहे तो क्या हो, यह दर्ज होता है।

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डेयरी की भूमि उसके मालिक के पास रहती है। फ़र्म को केवल डेयरी के लिए उसके उपयोग की अनुमति दी जाती है; कोई पट्टा या काश्तकारी नहीं बनती। इसके लिए नहीं: डेयरी से अलग सामान्य कारोबारी साझेदारी (साझेदारी विलेख लें); दो से अधिक साझेदारों की साझेदारी या ऐसी जिसमें भूमि पूँजी के रूप में लगे और अधिक मसौदे की ज़रूरत हो (वकील से तय करवाएँ); साझेदारी समाप्त करना (साझेदारी विघटन विलेख लें); पशुओं की एक बार की बिक्री (पशु बिक्री रसीद लें)।

क्या यह यहीं भरा जा सकता है

यह यहीं भरा जा सकता है

यह दस्तावेज़ आप इसी साइट पर भर सकते हैं, और कुछ भी तय करने से पहले पूरा मसौदा स्क्रीन पर पढ़ सकते हैं। यह ध्यान से तैयार किया गया प्रारूप है; आपके अपने हालात पर दी गई सलाह नहीं।

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स्टाम्प ड्यूटी, रजिस्ट्री और गवाह देखें

नीचे जो लिखा है वह पंजाब और चंडीगढ़ के लिए है। इसमें वहीं की स्थिति दी गई है, यह नहीं कि यह कहाँ-कहाँ कैसे बदलती है — यानी नीचे की रकमें वही हैं जो लागू होती हैं। दरें बदलती रहती हैं, इसलिए सब-रजिस्ट्रार दफ़्तर से पक्का कर लेना ठीक रहता है। अगर प्रॉपर्टी भारत में कहीं और है, तो इनमें से कुछ भी आपके लिए नहीं है।

स्टाम्प ड्यूटी

साझेदारी के दस्तावेज़ पर पंजाब में लागू अनुसूची I-A की साझेदारी प्रविष्टि के अंतर्गत, या चंडीगढ़ की संगत प्रविष्टि के अंतर्गत, शुल्क लगता है, और शुल्क प्रायः लगाई गई पूँजी पर निर्भर होता है। इस मसौदाकार को दोनों के लिए कोई एक वर्तमान राशि पक्की नहीं मिली, इसलिए कोई राशि नहीं लिखी गई। स्टाम्प ख़रीदने से पहले सरकारी ई-स्टाम्पिंग पोर्टल पर या उप-पंजीयक के काउंटर पर पूछ लें, और हस्ताक्षर से पहले ई-स्टाम्प लें। साझेदारों या हिस्सों में बाद का कोई बदलाव नया दस्तावेज़ होगा।

रजिस्ट्री

यदि पूँजी केवल नक़दी, पशु और उपकरण हो, तो यह करार पंजीकृत कराना अनिवार्य नहीं है; यदि कोई साझेदार भूमि फ़र्म में लाए तो अनिवार्य होगा। अलग से, फ़र्म स्वयं भारतीय साझेदारी अधिनियम, 1932 के अंतर्गत फ़र्मों के रजिस्ट्रार के पास पंजीकृत हो सकती है। फ़र्म का पंजीकरण अनिवार्य नहीं है, पर उस अधिनियम की धारा 69 के अनुसार अपंजीकृत फ़र्म और उसके साझेदार, कुछ सीमित अपवादों को छोड़कर, फ़र्म के किसी अनुबंध से मिले अधिकार को लागू करवाने के लिए मुक़दमा नहीं कर सकते, इसलिए पंजीकरण करवाना प्रायः समझदारी है।

नोटरी

आवश्यक नहीं। हस्ताक्षर असली होने के अतिरिक्त भरोसे के लिए कोई भी पक्ष इसे नोटरी से प्रमाणित करवा सकता है; मूल फ़ोटो पहचान-पत्र साथ ले जाएँ।

गवाह

क़ानूनन आवश्यक नहीं, पर गाँव के रिवाज़ में दो वयस्क साक्षी, जो पक्षकार न हों, रखे जाते हैं और नीचे उनके लिए स्थान है।

स्टाम्प पेपर का अनुरोध करें

Sample preview — placeholder answers, not your data

DAIRY FARM PARTNERSHIP AGREEMENT

This agreement is made at Village Rurki, Tehsil Samrala on 2 April 2026.

BETWEEN

Harjinder Singh, of Village Rurki, Tehsil Samrala, District Ludhiana, mobile 98140-00000 (the "First Partner");

AND

Baldev Singh, of Village Bhatian, Tehsil Samrala, District Ludhiana, mobile 98140-00000 (the "Second Partner").

  1. 1. THE FIRM

1.1 The partners carry on the business of dairy farming, that is, keeping milch cattle and producing and selling milk and the animals' produce, in partnership under the name Rurki Dairy Farm (the "Firm"), at Village Rurki, Tehsil Samrala, District Ludhiana, from 1 April 2026.

1.2 The partnership has no fixed end date. It is a partnership at will, that either partner may end on the notice in clause 9.

  1. 2. WHAT EACH PARTNER PUTS IN

2.1 The First Partner puts into the Firm: 20 milch buffaloes valued at 18,00,000 rupees; the milking machine; cash of 2,00,000 rupees.

2.2 The Second Partner puts into the Firm: The shed and fodder store, and full-time labour.

2.3 Cattle and equipment put in as above become the property of the Firm, and the partners shall make a signed list of the animals, with their tag or ear numbers, and keep it with this agreement. Calves born, and animals bought out of the Firm's money, belong to the Firm.

2.4 The land and shed used by the Firm belong to the First Partner. The Firm has only the use of them for the dairy for as long as the partnership lasts. This agreement is not a lease, and gives the Firm or the other partner no tenancy or other right in the land. The partner who owns them keeps paying the land revenue and any levy on the land.

  1. 3. PROFIT AND LOSS

3.1 The profit of the Firm, after paying feed, fodder, medicine, veterinary and labour costs, electricity, repairs and other running costs, shall be shared: First Partner 60 per cent, Second Partner 40 per cent. Losses shall be borne in the same shares.

3.2 Each partner may draw ₹25,000 (Rupees Twenty Five Thousand only) a month on account of his share of profit. Any drawing above the profit due to him at the year-end shall be returned to the Firm.

  1. 4. RUNNING THE DAIRY

4.1 The day-to-day work shall be run by both partners together. Each partner shall give his time and effort to the Firm and shall not run a competing dairy business.

4.2 The milk shall be sold as follows: To the milk plant or co-operative society that collects at the village, and by retail to local customers. All sale money shall be paid into the Firm's bank account and not kept by one partner.

4.3 The Firm shall have a bank account in its own name, operated by both partners, or by either of them for sums up to a limit they agree in writing.

4.4 Neither partner shall, without the other's written consent, sell or pledge the Firm's cattle or equipment except in the ordinary course of the dairy, borrow in the Firm's name, or sign a contract for the Firm that binds it for more than one year.

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